जीप गाँव से बाहर निकल चुकी थी। धूल पीछे उड़ रही थी। सड़क धीरे-धीरे कच्चे रास्ते में बदल रही ...
नील ने एक्सेलरेटर पर दबाव बढ़ाया। कार हाईवे पर ज्वाइन हुई और रॉकेट की तरह आगे झपटी। नील और ...
कबलोई जाने वाली बस खटारा थी। सीटों का फोम बाहर निकला हुआ। खिड़कियाँ आधी बंद, आधी जाम। हर गड्ढे ...
शाम के पाँच बज चुके थे। प्रतुल के शहर वाले घर का ड्रॉइंग रूम असामान्य रूप से भरा हुआ ...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस ...
एक महीना बीत चुका था। सुबह की सड़कें अभी पूरी तरह जागी नहीं थीं। नील दौड़ रहा था—कंधों से ...
पंद्रह दिन बाद, ग्रीन ज़ोन एरीना, अहमदाबाद। सुबह की धूप अभी नरम थी, पर ट्रैक पर खड़ी गाड़ियों के ...
कमरा अँधेरा था। नील की पीठ नरम सतह से लगी हुई थी। बिस्तर। या शायद कुछ और—उसे फ़र्क़ नहीं ...
अहमदाबाद प्रतुल मोतवाणी के शहर वाले घर के बाहर गहमागहमी थी। महँगी गाड़ियाँ एक के बाद एक आ रही ...
शाम ढल चुकी थी। पाँच सितारा होटल के बाहर रोशनी अभी भी तेज़ थी—काँच के दरवाज़ों से छनकर फुटपाथ ...