काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के छींटे डाल दिए ...
विराज के 'इस्तीफे' शब्द ने कमरे में जैसे समय को रोक दिया था। काव्या की आँखों में आँसू थे, ...
कमरे के अंदर की हवा में बरसों से कैद सन्नाटा अब काव्या की सिसकियों और विराज की भारी सांसों ...
कमरे के भीतर का दृश्य देखकर काव्या सुन्न खड़ी थी। वह चीख जो उसके मुँह से निकली थी, अब ...
पहाड़ियों की चोटी पर स्थित उस विशाल और जर्जर हवेली को लोग 'चीखती हवेली' कहते थे। लोगों का मानना ...
Chapter 5रात के सन्नाटे में काव्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह फोटो रह-रहकर उसके सामने आ ...
विराज मल्होत्रा के चले जाने के बाद भी काव्या वहीं हॉल में खामोश खड़ी रही। उसके दिल की धड़कनें ...
Chapter 3 इश्क और इस्तीफा काव्या ने धीरे से अपने कमरे ...
पहाड़ियों के बीच स्थित वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। गाँव वालों का मानना था कि वहाँ ...
अध्याय 2 पिंजरे में पहली रातकाव्या ने अपने हाथ में पकड़े बैग को ...