वाणी अपने कमरे में जाती है।सूरज की हल्की किरणें खिड़की से छनकर अंदर आ रही थीं। कमरे में सादगी ...
सुबह की हल्की धूप अभी पूरी तरह फैली भी नहीं थी किवाणी नींद से उठकर चुपचाप अपने कमरे से ...
Hअगस्त्य अपनी घड़ी पर समय देखता है—रात काफ़ी हो चुकी थी, पर उसका दिमाग़ अटका हुआ था उस लड़की ...
उधर वो लड़की आखिरकार अपने घर के बाहर पहुँचती है।थकी हुई साँसें… माथे पर पसीना… और अभी भी हल्का ...
Singhania ऑफिस के बाहर एक—एक कर के सभी कारें आकर रुकती गईं।दरवाज़े खुलते ही दर्जनों बॉडीगार्ड बाहर निकलकर सीधी ...
रात का वक्त…सड़क पर पसरा हुआ गहरा सन्नाटा…और उसी सन्नाटे को चीरती हुई5–6 ब्लैक लग्ज़री कारें,पूरी रफ़्तार में दौड़ ...
रात के ठीक 12 बज रहे थे।सिंहानिया ऑफिस में अफरा–तफरी मची हुई थी।हर तरफ टेंशन… बेचैनी… और एक ही ...