CHIRANJIT TEWARY stories download free PDF

तेरे मेरे दरमियान - 79

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी :- अगर तुम दोबारा मेरे सामने आए तो कसम से मैं अपनी जान दे दूगी , आज के ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 58

by CHIRANJIT TEWARY
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चतूर कहता है ----> आलोक क्यों ना बाईक को कुछ दुर और अंदर ले जाकर दैखते है़ ?आलोक कहता ...

तेरे मेरे दरमियान - 78

by CHIRANJIT TEWARY
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रागिनी आदित्य के आंखों मे जानवी के लिए प्यार और चिंता दैखती है , आदित्य ने सवाल तो धिरे ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 57

by CHIRANJIT TEWARY
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> मालिक ! इस कागज पर ऐसा क्या लिखा है जिससे पड़कर आपकी ये हालत हो गयी।दक्षराज कागज़ को ...

तेरे मेरे दरमियान - 77

by CHIRANJIT TEWARY
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रमेश: - “जल्दी!! अंदर ले चलो!!”आदित्य ने हल्के से जानवी को अपनी बाँहों में उठाया, पर उसके उठते ही ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 56

by CHIRANJIT TEWARY
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गुणा कहता है --> क्या बात है यार ये अचानक बाइक की लाइट क्यो बंद हो गई।आलोक बाइक की ...

तेरे मेरे दरमियान - 76

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।कार मे वो अकेली थी लेकिन उसके अंदर अकेलापन समंदर जैसा ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 55

by CHIRANJIT TEWARY
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दयाल की बात सुनकर दक्षराज जौर जौर से हंसने लगता है और कहता है---> हा हा हा हा । ...

तेरे मेरे दरमियान - 75

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य की बात को पुरा होने से पहले ही बात को बिच मे काट देती है और जानवी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 54

by CHIRANJIT TEWARY
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सभी आलोक की और बड़े गौर से दैख रहा था । आलोत अपनी जारी रखते हुए कहता है--> उनकी ...