अध्याय मन को वश में करो — वश या बोध? बीज-विचार मन को वश में करने से पहले यह ...
बनने से मिटने तक जीवन का मूल क्या है? कुछ बनने में—या हर क्षण मिटकर फिर बनने में? प्रकृति ...
आकर्षण का रहस्य — बाहर का द्वार भीतर खुलता है शरीर की भाषा जैसे कहती है—“भीतर आओ।” लेकिन मनुष्य ...
कोई प्रश्न नहीं—सीधा देखो। Vedanta 2.0 विज्ञान हो, आध्यात्म हो, धर्म हो या बुद्धिजीवी मनुष्य—सब किसी न किसी ...
Philosophy of Non-Finality / गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम वेदांत 2.0 — अंतिम स्वतंत्रता घोषणादेखो — पर ...
Agyat Agyaniअज्ञात अज्ञानीIndependent Researcher & PhilosopherVedanta 2.0 | Consciousness | Non-Duality | Philosophy of MindExistenceConsciousnessVedantaNon-DualityMetaphysicsCosmologyHuman Evolutionhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685◍vedanta2life.comh
सत्य, शून्यता और कालबुद्ध भिक्षापात्र लेकर खड़े होते हैं। उसका बाहरी अर्थ गरीबी या त्याग नहीं है। उसका संकेत ...
वही शून्य है।ज्ञान का बोझ और शून्यमनुष्य बड़ा विचित्र प्राणी है।वह जीवन को जीने से ज्यादा,जीवन को समझने की ...
विरोध नहीं, जागरणकेवल बात करने से यदि सब कुछ संभव होता, तो यह संसार कब का स्वर्ग बन गया ...
धर्म का स्वप्न और सत्य का जागरणवेदांत 2.0 के परिप्रेक्ष्य में मन, अहंकार और विश्वास का अध्ययनअज्ञात अज्ञानीIndependent Researcher ...